आप के पाप

दिल्ली की है यही पुकार, अब और नहीं चाहिए निकम्मी सरकार

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न जन लोकपाल, न स्वराज, केवल अहंकार का राज

  • जो अपने गुरू अन्ना हजारे का नहीं हुआ वो किसका होगा।
  • सशक्त जन लोकपाल का वादा था जिसके दायरे में मुख्यमंत्री भी आएंगे।
  • ऐसा जन लोकपाल जिससे रामराज्य ला देंगे। कहां है ?
  • यहां तक कि याद करें अपनी पार्टी के आंतरिक लोकपाल एडमिरल राम दास को धक्के मारकर पार्टी से निकाला।
  • जन लोकपाल तो आया नहीं लेकिन इनके भ्रष्टाचार के मामले 5 सालों में निरंतर बढ़ते गए।
  • कहां है स्वराज विधेयक ? जिसे लेकर स्वराज की बातें की, जिसमें मोहल्ला सभा एवं दिल्ली डायलॉग की बात की। आज तक एक भी सभा और एक भी बैठक नहीं हुई।
  • याद करिए राजधानी दिल्ली के मुख्यमंत्री ने भारतीय सेना की सर्जिकल स्ट्राइक पर प्रश्नचिह्न खड़े किए और केन्द्र सरकार से सबूत मांगे थे। रातो-रात पाकिस्तान की मीडिया के तो हीरो बन गए और अपने वीर सैनिकों की बहादुरी पर संशय किया।
  • टुकड़े टुकड़े गैंग की कवच बनी केजरीवाल सरकार ने आरोपी कन्हैया कुमार और उमर खालिद को बचाने के लिए अभी तक एनओसी नहीं दिया जो कि मुख्यमंत्री को देना होता है। जवाब दें किन देश विरोधी ताकतों के इशारों पर देशद्रोह के आरोपियों को बचाया जा रहा है।
  • अफज़ल गुरु को शहीद बताया।
  • मुख्यमंत्री होते हुए गणतंत्र दिवस के विरोध में राजपथ पर बैठे केजरीवाल

    “मेरी न सुनी तो गणतंत्र दिवस का कार्यक्रम बिगाड़ दूंगा”
    “हां हम Anarchist हैं, अराजकता में हमारा विश्वास है”

  • वीआईपी कल्चर लाल बत्ती व बंगला नहीं लूंगा का वायदा किया था। आरटीआई के अनुसार केवल मुख्यमंत्री के नाम पर दो घर और 17 गाड़ियां हैं।
  • रामलीला मैदान में भ्रष्टाचार के विरूद्ध मंच से स्टिंग (Sting) ऑपरेशन करने का एलान दिल्ली वासियों से किया था। याद करें-कहा था कोई रिश्वत मांगे तो सेटिंग कर लेना और रिकार्डिंग कर लेना। दिल्ली की जनता जानना चाहती है कि आज तक क्या एक भी कार्रवाई हुई।
  • वादा था दिल्ली में हर घर में वर्ल्ड क्लास साफ पीने का पानी घर घर टूंटी से पंहुचेगा, आज पाँच साल बाद सच ये है कि BIS की रिपोर्ट के मुताबिक देश के 21 बड़े शहरों में सबसे गंदा पानी दिल्ली वालों को मिलता हैं
  • आज हैजा, डायरिया जैसी गंदे पानी से होने वाली बीमारियों से दिल्ली के लाखों बच्चें बीमार हो रहे हैं, मर रहे हैं। RTI के मुताबिक दिल्ली जल बोर्ड में गंदे पानी की 1 लाख 65000 शिकायते आई हैं, 6 लाख से ज्यादा बच्चें सरकारी अस्पतालों में डायरिया का इलाज करवाने आये। इन बच्चों को गंदा पानी मौत के मुंह मे धकेल रहा हैं।
  • दिल्ली की हर बस्ती, हर मोहल्ले में सीवर मिला हुआ गंदा बदबूदार पानी आ रहा हैं।
  • टैंकर माफिया आज दिल्ली की बस्तियों में पानी बेचने का धंधा चला रहा हैं। हर मार्किट, हर दुकान में पानी खरीदकर पीना पड़ रहा हैं। पानी बेचना दिल्ली में एक धंधा बन चुका हैं।
  • वादा था पूरी दिल्ली में सीवर डालने का, लेकिन सच ये है कि जहां पहले से सीवर था वहां भी आज हर रोज सुबह गंदा बदबूदार पानी सड़कों पर बहता है और बीमारियां फैलाता है।
  • RTI के मुताबिक एक कड़वा सच ये भी है कि जब से केजरीवाल ने दिल्ली जल बोर्ड की कमान संभाली, 178 करोड़ मुनाफे में चलने वाला जल बोर्ड 800 करोड़ के घाटे में चला गया। ये पैसे आखिर कहां गए?
  • वादा था साफ यमुना का, वादा था एक भी सीवर यमुना में नहीं गिरने देंगे, सच ये हैं कि पांच साल में यमुना पहले से भी गन्दी हुई है। मोदी सरकार ने दिल्ली सरकार को यमुना सफाई के लिए 3500 करोड़ रुपए का फंड दिया वो भी धरा का धरा रह गया, यमुना आज भी मैली की मैली है।
  • हालात ये है छठ पूजा, दुर्गा पूजा, गणेश विसर्जन सब करने के लिए करोड़ों श्रद्धालुओं को गंदे बदबूदार झाग वाले पानी मे उतरना पड़ता है।
  • वादा था कि दिल्ली की अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित एवं पक्का किया जाएगा। 5 साल में केजरीवाल ने एक भी नक्शा नहीं बनाया, सुप्रीम कोर्ट के बार बार कहने के बावजूद।
  • दिल्ली की कॉलोनी वासियों के हित में इसलिए केंद्र सरकार को अपने हाथ में लेना पड़ा। केवल 100 दिन में मोदी सरकार ने संसद में बिल बनाकर इसे पास किया और मालिकाना हक दिया।
  • केजरीवाल ने कोर्ट में एफीडेविट देकर हाथ खड़े कर दिए कि 2021 तक कच्ची कॉलोनियों के नक्शे नहीं बन सकते। जबकि मोदी सरकार ने यह काम 20 दिन में 1200 कच्ची कॉलोनियों के नक्शे बनाकर डीडीए के पोर्टल पर डालकर सार्वजनिक भी कर दिया।
  • दशकों की उदासीनता के बाद दिल्ली के अनधिकृत कॉलोनी वासियों को राहत मिली- मालिकाना हक मिला।
  • शिक्षा के नाम पर आम आदमी पार्टी सरकार में घोषणाएं और तमाशा तो बहुत हुआ लेकिन चाहे बात स्‍कूलों के रिजल्‍ट की हो या टीचरों की भर्ती की, हर मामले में स्‍थिति पहले से खराब ही हुई है। एक कड़वा सच यह भी है कि शिक्षा के नाम पर जो बजट घोषित किया गया, आम आदमी पार्टी सरकार उसका आधा भी खर्च नहीं कर पाई।
  • घोषणा पत्र में वादा था कि 20 नए डिग्री कॉलेज बनवाएंगे-एक भी कॉलेज नहीं बना।
  • वादा किया था कि 12वीं कक्षा के बाद डिप्लोमा या डिग्री प्राप्त करने के इच्छुक छात्रों को बिना गारंटी बैंक लोन दिया जाएगा- क्या हुआ आपके इस वादे का मात्र 114 छात्रों को ही लोन मिल पाया।
  • घोषणा पत्र में वादा था कि 500 नए सरकारी स्कूल बनाएंगे, एक भी नया स्कूल नहीं बना, जिन पुराने स्कूलों में कुछ कमरे बनवाए गए उनमें भी 2000 करोड़ रू का घोटाला कर डाला, आरटीआई के अनुसार 9 लाख रू वाले कमरे का 25 लाख रू भुगतान किया गया।
  • 20 हजार गेस्ट शिक्षकों को पक्का करने का वादा था, दिल्ली के एक भी शिक्षक को पक्का नहीं किया।
  • दिल्ली के अनुसूचित जाति वाले छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए लोन देने के लिए करोड़ों के विज्ञापन दिए और केवल 4 दलित छात्रों को ही लोन मिला।
  • शिक्षा पर बड़े बड़े दावे करने वाले मुख्यमंत्री यह जबाव दें, 2014 से अब तक 2.50 लाख बच्चों का एडमिशन कम क्यों हुआ है?
  • शिक्षा के नाम पर केवल विज्ञापन और दिखावा करने वाले मुख्‍यमंत्री यह जबाव दें कि आखिर क्‍यों आरटीआई के मुताबिक पिछले एक साल में ही सरकारी स्‍कूलों में पढ़ने वाले बच्‍चों की संख्‍या में 2.5 लाख से ज्‍यादा की कमी आखिर क्यों आई?
    • शिक्षा की तरह ही स्‍वास्‍थ्‍य में भी विज्ञापन और दिखावा तो खूब किया गया लेकिन बात चाहे सरकारी अस्‍पतालों की हो या पॉली क्‍लीनिक या सरकारी डिस्‍पेंसरी की, पिछले 5 सालों में दिल्‍ली की स्‍वास्‍थ्‍य व्‍यवस्‍था ही गंभीर बीमारी का शिकार हो गई है।
    • वादा किया था कि अस्पतालों में 30,000 अधिक बेड बनाएंगे, जिनमें से 4,000 बेड प्रसूति वार्डों में होंगे जिसमें आज तक 200 बेड कम हो गए।
    • आज दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में ना सिटी स्कैन है, ना एक्स रे, ना नवजात बच्चों की नर्सरी, ना ऑपरेशन की सुविधा, ना रेबीज के इंजेक्शन, ना दवाई, ना पट्टी, लोकनायक जैसे बड़े सरकारी अस्पतालों में ऑपरेशन थिएटर बंद हो रहे हैं।
    • मोदी जी व भाजपा के प्रति नफरत के चलते दिल्ली के लाखों गरीब लोगों का आयुष्मान जैसी प्रभावी योजना (जिसमें हर परिवार को हर साल पांच लाख रूपए तक का इलाज मुफ्त मिलता) से वंचित रखा। जहां देश भर में 70 लाख से ज्यादा लोगों ने इसका लाभ उठाया, दिल्ली में दुर्भावना के चलते दिल्ली वालों को इस योजना से वंचित रखा।
    • एक भी- नया सरकारी अस्पताल या डिस्पैंसरी नहीं बना और जो मोहल्ला क्लिनिक बने उनमे ना दवाई हैं ना सुविधा।
    • जिन मोहल्ला क्लीनिकों के नाम पर करोड़ों के विज्ञापन किए जा रहे हैं, 1000 का वादा करके दिखावे के लिए थोड़े से खोले वो भी मंहगा किराया देकर अपने ही कार्यकर्ताओं की प्रापर्टी पर और उनमें से 90 प्रतिशत मोहल्ला क्लीनिक गंदगी और कूड़े के ढेर हैं सिर्फ 5-7 दिखाने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे हैं।
    • वादा था कि प्रदूषण को खत्म करने के लिए एयर पयुरिफाइर/वैक्यूम क्लीनर/जगह-जगह पर लगाए जाएंगे। इलैक्ट्रिक बसें चलाई जाएंगी। यहां तक कि कृत्रिम Rain Cloud का भी सपना दिखाया गया था। कहां गई सपनों की दिल्ली?
    • सड़कों को सप्ताह में एक बार धोया जाएगा।
    • दिल्ली की जनता ने गाढ़ी कमाई से 1200 करोड़ का Green Cess दिया। आर.टी.आई. के खुलासे से पता चला कि इसमें से 18 प्रतिशत भी इस्तेमाल नहीं हुआ।
    • स्वच्छता की जिम्मेदारी नगर निगम की है, लेकिन नगर निगम के 10000 करोड़ रोक कर दिल्ली को अस्वच्छ किया।
    • प्रदूषण न रोकने के कारण नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने दिल्ली सरकार पर 25 करोड़ का जुर्माना लगाया।
    • प्रदूषण के विज्ञापनों पर 15 करोड़ रूपए खर्च कर दिल्ली की जनता का पैसा डुबाया।
    • केजरीवाल सरकार का दावा है कि अपने कार्यकाल के दौरान प्रदूषण में 25 प्रतिशत कमी लाने में कामयाब रही है। यह भी केजरीवाल सरकार का अन्य संस्थाओँ द्वारा किए गए कार्य का श्रेय लेने का दुस्साहस है। सच्चाई तो यह है कि दिल्ली में प्रदूषण में जो कमी आई है उसका श्रेय 2014 से 2019 के बीच भारत सरकार के केंद्रीय पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को जाता है। केजरीवाल को दूसरों की उपलब्धियों का श्रेय लेने की लत पड़ गई है।
    • केजरीवाल दिल्ली की प्रदूषण की समस्याओं के समाधान के लिये नगण्य फीसदी भी गंभीर नहीं हैं।
    • बिजली कम्पनियों को चोर कहकर, बिजली कंपनियों के खिलाफ आंदोलन करके सत्ता में आये। वादा था बिजली कम्पनियों से पैसे लेकर जनता में बांटे जाएंगे। लेकिन किया ठीक उल्टा। शीला दीक्षित की सरकार से जिन बिजली कंपनियों को 600 करोड़ रूपये की सब्सिडी मिलती थी, आज उन्हीं बिजली कंपनियों को आम आदमी सरकार द्वारा 2500 करोड़ रूपये सब्सिडी दी जा रही है।
    • 600 करोड़ रूपये सब्सिडी पर शीला दीक्षित द्वारा बिजली कंपनियों से कट मनी लेने की बात केजरीवाल हर जगह कहते थे, आज 2500 करोड़ रूपये में कितनी कट मनी जाती है ये सवाल पूछना जरूरी हैं।
    • वादा किया था कि Power Discoms का CAG ऑडिट होगा- आज तक ऑडिट क्यों नहीं हुआ ?
    • वादा किया था की आप पार्टी दिल्ली में ऐसी योजना लाएगी जिसमे लोग खुद चुन सकेंगे की किस बिजली कंपनी से उन्हे बिजली लेनी है- कहां है वो योजना ?
    • AAP ने 2025 तक सौर ऊर्जा के माध्यम से दिल्ली को 20 प्रतिशत ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने का वादा किया था। दुर्भाग्य से, दिल्ली केवल 506 KW बिजली का सौर उत्पादन कर रही हे जो केवल 0.00025% है। इसके अलावा, केवल 140 लोगों को छत पर सोलर पैनल स्थापित करने के लिए मदद दी गयी है।
    • वादा किया था कि दिल्ली में एक अपना नया विद्धुत संयंत्र लगाया जायेगा-यह वादा भी पूरा नहीं किया गया।
    • आप पार्टी ने वादा किया था कि महिलाओं की सुरक्षा के मद्देनजर दिल्ली में Dark Spots की पहचान की जाएगी एवं उन्हें रोशन किया जायेगा- इस दिशा में कोई भी काम नहीं हुआ। दो तिहाई से ज्यादा दिल्ली में अभी तक Dark Spots ज्यों के त्यों बने हुए है।
    • केजरीवाल ने कम लागत के 50 हजार आवास गरीबों को देने का वादा किया था, लेकिन अभी तक किसी को आवास प्रदान नहीं किया गया। केजरीवाल ने प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ भी दिल्ली में नहीं दिया, इससे लगता है कि वे लोगों को खुले में रहने को मजबूर कर रहे हैं। दिल्ली की जनता इस विषय में स्पष्टीकरण मांगती है।
    • केजरीवाल ने वादा किया था कि निम्न आय वर्ग के लिए वाजिब दाम पर फ्लैट निर्माण किया जाएगा और कहा था कि दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड के पास 200 एकड़ से अधिक भूमि उपलब्ध है जिसका इस्तेमाल फ्लैट बनाने के लिए किया जाएगा इसमें भी एक भी ठोस कदम नहीं उठाया- झूठ का पुलिंदा बनाया |
    • सभी को किफायती आवास उपलब्ध कराने का वादा था। एक को भी नहीं दिया। यहां तक कि पिछली सरकार द्वारा 52 हजार गरीबों के आवास बने हुए भी आवंटित नहीं कर पाई आम आदमी पार्टी की सरकार। आज भी खाली पड़े हैं और खंडहर बनते जा रहे हैं।
    • चुनाव सर पर देखकर झुग्गी बस्तियों में फर्जी जाली सर्टिफिकेट बांटने का नाटक शुरू कर दिया है-केजरीवाल ने। दिल्ली की जनता इनके फर्जी सर्टिफिकेट के झांसे में नहीं आने वाली।
    • आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक दिल्ली सरकार ने पिछले साढ़े चार साल में कोई नया फ्लाईओवर नहीं बनाया, बल्कि निर्माणाधीन फ्लाईओवर के आकार में कमी लाकर उसे पूरा किया और कहा कि सरकार ने करोड़ों रुपये की बचत की है। केजरीवाल क्या इसका जवाब देंगे।
    • दिल्ली सरकार ने तो किसान के हित में कोई निर्णय नहीं लिया लेकिन केन्द्र में भाजपा सरकार ने पीएम किसान योजना के अंतर्गत 60 वर्ष से अधिक आयु के किसानों को प्रति माह 3000 रूपए की मासिक पेंशन देना शुरू कर दिया है।
    • प्रधानमंत्री किसान योजना के तहत 6000 रुपए देशभर में 4.7 करोड़ किसानों को मिले जबकि अपनी छोटी एवं ओछी सोच के कारण दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने 15880 किसानों को इससे वंचित रखा।
    • दिल्ली रूरल डवलेपमेंट बोर्ड के 676 करोड़ रुपए के फंड में से एक रूपया भी दिल्ली के किसी गांव पर खर्च नहीं किया गया है। पूरा का पूरा फंड बिना खर्च किए लागातार 2 सालों तक वापस चला गया।
    • दिल्ली नशा मुक्त हो- केजरीवाल का वादा था लेकिन जमीनी स्तर पर सच्चाई इससे बहुत दूर है। यही नहीं नशा मुक्त दिल्ली की बात करने वाले केजरीवाल ने शराब के 400 नए लाइसेंस और शराब की कीमतों को 25% कम किया। दिल्ली के युवाओं को नशे की ओर धकेल रही है आम आदमी पार्टी की सरकार।
    • आरटीआई से ज्ञात हुआ कि एक भी नया नशा मुक्ति केन्द्र दिल्ली में नहीं खुला है।
    • सीसीटीवी कैमरे और वाई फाई 55 महीने की गहरी निद्रा से जागने के बाद दिल्ली सरकार ने यह काम शुरू किया है और वह भी चुनावी फायदे के लिये।1.40 लाख सीसीटीवी लगाने का वायदा किया था मगर अभी कुछ ही लगे हैं। अब तक केवल 25 बसों में सीसीटीवी कैमरे लगाये गये हैं।
    • पारदर्शिता की बात करने वालों ने सत्ता में आते ही 2015 के चुनावी घोषणा पत्र से लेकर चंदे की डिटेल को वेबसाइट से हटा दिया। ताकि कोई सवाल न कर सके।
    • 2013-2014 में सत्ता के भूखे केजरीवाल ने दिल्ली में हजारों बेगुनाह सिखों के कत्लेआम की जिम्मेदार कॉग्रेस पार्टी के समर्थन से सरकार बनायी जिससे साबित हुआ कि दोहरे चरित्र के कारण दोगले केजरीवाल ने सिखों के हितों को सरे आम चकनाचूर कर दिया।
    • निर्वाचन आयोग ने आम आदमी पार्टी को चंदे को लेकर हर साल फर्जी अकाउंट जमा कराने के लिए दोषी पाया है। वाराणसी के चुनाव में भी हवाला और फर्जी कम्पनियों से चंदा लिया गया था। आम आदमी पार्टी पर यह भी आरोप है कि पंजाब विधानसभा चुनाव में उसने कनाडा में खालिस्तानी आतंकी संगठनों से चंदा लिया था। एक स्टिंग आपरेशन में यह बात सामने आई। अब पहले की तरह सामान्य लोग आम आदमी पार्टी को चंदा देने में संकोच करते हैं, क्योंकि वह चंदे के मामले में बदनाम हो चुकी है।
    • इंडिया अगेंस्ट करप्शन के दौरान मुख्यमंत्री बनने से पहले केजरीवाल को स्वयं को सबसे बड़ा ईमानदार मानते हुए देश के भ्रष्ट व्यक्तियों की सूची जारी करने का शौक पैदा हुआ था। उन्होंने कहा कि इन लोगों को चुनाव लड़ने की इजाजत न दी जाए। इनमें कपिल सिब्बल, सुरेश कलमाडी, मायावती, शऱद पवार, पवन बंसल, नवीन जिंदल आदि कई नेताओं के नाम थे, जिनके साथ अब वे मिल कर ईवीएम और भाजपा के खिलाफ मोर्चाबंदी कर रहे हैं।
    • वादा था 5000 नई डीटीसी बसें चलाएंगे- डाटा बताता है कि डीटीसी बसों की कुल संख्या 31 मार्च, 2015 को 4,705 थी और 12 नवंबर, 2019 तक यह 3,781 बसों तक पहुंच गई है। दिल्ली वालों को 6087 बसों की कमी से वंचित रखा जबकि सर्वोच्च न्यायालय ने भी 11000 बसों की खरीद के लिए दिल्ली सरकार को बार-बार फटकार लगाई।
    • आप ने वादा किया था कि दिल्ली में एकीकृत (Unified) ट्रांसपोर्ट ऑथोरिटी का गठन किया जाएगा- ऐसी कोई अथॉरिटी अब तक नहीं बनाई गई।
    • मेट्रो लाइन को बढ़ाने का वादा पूरा करना तो दूर की बात, चौथे फेज को 2.5 साल तक लटका कर रखा गया।
    • बसों में सुरक्षा गार्ड और अलार्म लगवाने का वादा किया था, लेकिन 98 प्रतिशत बसों में यह सुविधा नहीं है। केजरीवाल किस तरह दावा कर सकते हैं कि उनके शहर में विश्वस्तरीय सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था है।
    • केजरीवाल सरकार ने 5 हजार मार्शल बसों में नियुक्त करने का वायदा किया था जिनमें से केवल थोड़े से ही मार्शल लगाये गये हैं। दिल्ली सरकार हर मोर्चे पर फेल दिख रही है।
    • महिला सुरक्षा के लिये मोबाइल में सिक्योरिटी पुश बटन लगा कर उसे पीसीआर के साथ कनैक्ट करने का वादा भी सभी वादों की तरह काफूर हो गया है। इसी तरह चुनाव में भी केजरीवाल सरकार हवा की तरह उड़ती दिखायी देगी।
    • केजरीवाल की शह पर बुराड़ी परिवहन अथारिटी में खुल्लम-खुल्ला करप्शन है। उन्होंने नई अथारिटी तो बनाई, लेकिन वहां स्वचालित कम्प्यूटरों जैसी पूरी सुविधा नहीं है और लोगों को वहां तक पहुंचने में कोई बस, आटो और ग्रामीण सेवा नहीं मिलती।
    • केजरीवाल से जनता जानना चाहती है कि यूनिफाइड स्मार्ट कार्ड का क्या हुआ? क्या केवल यह सपना था या छलावा? कहा था कि रिंग रेल सेवा शुरू करेंगे- कहां है रिंग रेल सेवा?
    • मैट्रो से लेकर दूर दराज के इलाकों तक लास्ट-माइल कनेक्टिविटी देने का वादा था- जबकि केन्द्र सरकार ने 956 फीडर बस मेट्रो स्टेशन पर चलाई।
    • केजरीवाल सरकार ने घोषणा पत्र में वादा किया था कि ऑटो रिक्शा स्टैण्ड बनाए जाएंगे और ऑटो चालकों को वाहन खरीदने के लिए बैंक से लोन प्रदान कराए जाएंगे। वादे के अनुसार सबकुछ नहीं किया गया।
    • दिल्ली के तीनों नगर निगमों को शुरू से ही केजरीवाल सरकार पंगु बनाने का काम कर रही है। तीन बार से भाजपा, नगर निगम चुनाव अपने कामकाज के बूते पर जीत रही है । केजरीवाल चाहते नहीं कि चौथी बार भी निगमों पर भाजपा सत्तारूढ़ हो इसलिये उन्होंने तीनों निगमों को पैसे पैसे का मोहताज बना रखा है। विकास के काम रुके हैं, कर्मचारियों को कई महीनों तक वेतन नहीं मिलता और नयी परियोजनाओं की कल्पना नहीं की जा सकती। केजरीवाल के सीएम बनने से पहले कोई भी सरकार निगमों को साथ ऐसी राजनीति नहीं किया करती थी। केजरीवाल ने तीनों निगमों को दिल्ली को चौथे और पांचवें वित्त आयोग के तहत मिलने वाली राशि से भी वंचित किया हुये हैं। अभी 4 अक्तूबर को दिल्ली के उप राज्यपाल ने दक्षिणी दिल्ली में एक समारोह में माना कि तीनों नगर निगम वित्तीय कठिनाइयों का सामना करते हैं और उन्हें दिल्ली सरकार से अक्सर पूरी देय राशि नहीं दी जाती। ऐसे में भी निगम उत्तम सुविधायों और सेवायें दे रहे हैं।
    • केजरीवाल ने घोषणापत्र में वादा किया था कि दिल्ली को ट्रेड और रिटेल हब बनाया जाएगा तथा व्यापारियों के हित में नीतियों पर अमल किया जाएगा। इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया लेकिन केंद्र में भाजपा सरकार ने प्रधानमंत्री लघु व्यापार मान धन योजना के अंतर्गत 60 वर्ष से अधिक आयु के व्यापारियों को प्रति माह 3000 रूपए की मासिक पेंशन देना शुरू कर दिया है।
    • केजरीवाल ने मूल्य वृद्धि, काला बाजारी, जमाखोरी और मुनाफाखोरी पर काबू पाने के लिए कदम उठाने का उल्लेख घोषणा पत्र में किया था लेकिन इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
    • केजरीवाल ने कहा था कि मुख्यमंत्री बनने पर वे सरकारी बंगला नहीं लेंगे, सरकारी गाडी नहीं लेंगे और अपने कार्यालय तथा स्वयं पर कम से कम सरकारी खर्च होने देंगे। लेकिन, चंद दिनों में उन्होंने यू-टर्न ले लिया।
    • उन्होंने भ्रष्टाचार को उजागर करने का मसीहा बनते हुए प्रत्येक दल के बड़े बड़े नेताओं पर करप्शन के आरोप लगाए, जिन्होंने उन पर मानहानि का दावा किया, लेकिन थक हार कर केजरीवाल को माफी मांगनी पड़ी। उन्होंने अरुण जेटली, विक्रम मजीठिया, नितिन गडकरी और कपिल सिब्बल से माफी मांगी।
    • क्या कभी केजरीवाल ने सोचा कि ऐसा उनके साथ क्यों हो रहा है। पार्टी बनाने के मुद्दे पर भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष के सबसे बड़े पुरोधा अन्ना हजारे ने सबसे पहले उनका साथ छोड़ा।
    • उसके बाद एक के बाद एक सैकड़ों लोग केजरीवाल से निराश-हताश होकर पार्टी से बाहर निकलते गए। कुमार विश्वास, योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण, कपिल मिश्र, आशीष खेतान, किरण बेदी, आशुतोष, मयंक गांधी, मधु भादुड़ी, आनंद कुमार, अजित झा, अंजली डालमिया, कैप्टन जी.आर. गोपीनाथ, शाजिया इल्मी, अशोक अग्रवाल, मौलाना काज़मी, अश्विनी उपाध्याय, सुरजित दासगुप्ता, नूतन ठाकुर, एमएस धीर, विनोद कुमार बिन्नी, बवाना के विधायक वेद प्रकाश, अनिल वाजपेयी, विधायक-गांधी नगर, बिजवासन के विधायक कर्नल सेहरावत और सैकड़ों लोग केजरीवाल से परेशान होकर पार्टी से अलग हो गए।
    • इन सभी लोगों को गलत नहीं कहा जा सकता, क्योंकि ये केजरीवाल को तानाशाह और गलत मान कर पार्टी से अलग हुए। लगता है, दिल्ली अब केजरीवाल को गलत साबित करेगी।

      याद करें रामलीला मैदान से गाया था- “इंसान का इंसान से हो भाईचारा, यही पैगाम हमारा। पीठ में खंजर घोंपना है काम हमारा, यही अंदाज हमारा।” और अब उनका असली चेहरा

    • दिल्ली और देश के इतिहास में पहली बार तत्कालीन मुख्य सचिव अंशु प्रकाश को आधी रात को मुख्यमंत्री निवास में बैठक के लिए बुला कर प्रताड़ित, अपमानित किया गया और पीटा गया।
    • पहली बार दिल्ली के दानिक्स और आईएएस अधिकारियों ने मुख्य सचिव अंशु प्रकाश के साथ दुर्व्यवहार को लेकर केजरीवाल के खिलाफ दिल्ली सचिवालय में बड़ा आंदोलन चलाया।
    • पिछले दिनों सारी दिल्ली और देश ने देखा किस तरह दिल्ली को दंगों की आग में झोंकने की साजिश रची गई। जिस प्रकार दिल्ली की सड़कों पर बसें जलाई गई, बच्चों से भरी हुई स्कूल की बसों पर पत्थर मारे गए, पुलिस के ऊपर पेट्रोल बम और पत्थरों से हमला किया गया, ऐसा लगा जैसे सुनियोजित तरीके से पूरी दिल्ली को दंगों की आग में झोंका जा रहा है।
    • जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में दंगे होने से ठीक पहले वहां आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्ला खान खुले आम लोगों को भड़काते हुए देखे गए। भरी भीड़ में अमानतुल्ला खान ने यह झूठ फैलाया कि नागरिकता कानून से नरेन्द्र मोदी मुस्लिमों की दाढ़ी, टोपी, अजान और बुर्का बैन करवाने वाले हैं। यह सीधे-सीधे दंगा भड़काने वाला बयान था। अमानतुल्ला खान के इस भाषण के तुरंत बाद जामिया मिलिया इस्लामिया में सवारियों से भरी बसों में आग लगाई गई और पूरे शहर में दंगे फैलाए गए।
    • इससे भी बड़ी साजिश उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया ने रची जब उन्होंने दंगईयों को बचाने के लिए झूठे ट्वीट किए और पुलिस पर ही बसों में आग लगाने का झूठा इल्जाम लगाया। सीसीटीवी से मिले विडियो में साफ दिख रहा था कि पुलिस दंगों को रोकने और आग बुझाने में लगी हुई थी।
    • एक तरफ आम आदमी पार्टी के नेता और मंत्री दंगे भड़काने और दंगाईयों को बचाने में लगे थे, उसके साथ ही साथ आम आदमी पार्टी सीलमपुर के विधायक हाजी इशराक खान दंगाईयों की जमानत कराने के लिए खुद कोर्ट जाते हैं। दिल्ली सरकार के सरकारी वकील इन दंगाईयों को दिए जाते हैं।
    • इसके बाद बेशर्मी और तुष्टीकरण की सारी सीमाएं तोड़ते हुए केजरीवाल सरकार ने पुलिस पर पत्थर मारने वाले दंगाईयों को 5-5 लाख रूपए और सरकारी नौकरी देने की घोषणा भी की। 24 घंटे के अंदर कुछ दंगाईयों को 5-5 लाख रूपए के चैक देने भी शुरू कर दिए। जहां एक तरफ उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार दंगाईयों की संपत्ति जब्त कर रही है वहीं दिल्ली की केजरीवाल सरकार इन्हीं दंगाईयों को 5-5 लाख रूपए और नौकरी बांटने की घोषणा कर रही है।

    70 किये थे वादे, पूरे हुये न आधे। केजरीवाल वादों में 9 फीसद पास, किया दिल्ली की जनता के साथ 91 फीसद विश्वासघात।

    भले ही केजरीवाल पर यह आरोप पत्र इतना व्यापक नहीं जितना उनकी शक्सियत को देखते हुये होना चाहिये था मगर यह उनके दोहरे चेहरे को उजागर कर रहा है यानी उनके एक चेहरे के पीछे दूसरा चेहरा भी है जो खतरनाक तथा डरावना है मगर दिखाई नहीं देता। इसे पढ़ कर आप केजरीवाल के छिपे चेहरे को देख और समझ सकेंगे तथा उनकी करतूतों, कारस्तानियों और तिकड़मों से अवगत होंगे। सही बात तो यह है कि अगर आप की तरह ज्यादातर लोग उनकी सच्चाई जान लेंगे तो दिल्ली 2020 के विधानसभा चुनाव में केजरीवाल से मुक्त हो जायेगी। अब थोड़ा समय बचा है अवसरवाद, भाई-भतीजावाद, अन्याय और अनाचार, अत्याचार का अंत होने वाला है।